मैं-- मालिन मन-बगिया की

मन-बगिया में भाव कभी कविता बन महके हैं, कभी क्षोभ-कंटक बन चुभे हैं, कभी चिंतन-नव पल्लव सम उगें..

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हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर.. हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर...! (एक गीत)

Posted On: 1 Jan, 2015 Contest,Hindi Sahitya,Others में

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झूम रहा है पत्ता-पत्ता
झूम रही हर डाली..
नव वर्ष के नवल प्रात की
है यह छटा निराली…
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर..
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर…!

रंग-बिरंगे फूलों से
गुलशन ने सेज़ सजा ली..
कोमल पंखुरियों को छूकर देखो
नाच रहा है माली…
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर..
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर…!

उमंगों भरा संदेशा पाकर
कोकिल भी हुई मतवाली..
नव वर्ष के नवल प्रात की
है यह छटा निराली…
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर..
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर…
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर..
हैप्पी-हैप्पी न्यू ईयर…!!

– ‘दीक्षा’



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yamunapathak के द्वारा
January 1, 2015

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