मैं-- मालिन मन-बगिया की

मन-बगिया में भाव कभी कविता बन महके हैं, कभी क्षोभ-कंटक बन चुभे हैं, कभी चिंतन-नव पल्लव सम उगें..

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क्या सचमुच ऐसा होगा......??

Posted On: 13 Feb, 2015 Junction Forum,Politics,Others में

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यह अद्भुत है !
यह क्या गज़ब हो रहा भारतीय राजनीति में…!!
बीते लोकसभा चुनाव में ‘मोदी लहर’ के बाद दिल्ली में एक साधारण, संघर्षरत भूतपूर्व-प्रथम श्रेणी अधिकारी द्वारा यथार्थपरक मुद्दे (भ्रष्टाचार) को लेकर गठित गैर-कूटनीतिक आम-आदमी पार्टी की एकतरफा जीत…!
तो क्या..अब भारतीय राजनीति को दिशा मिल चुकी है ?
क्या अब वास्तव में हमारे यहाँ भाषणबाजी..अथवा ‘नेतागिरी से इतर ‘मुद्दा-परक’ राजनीति होगी ?
क्या अब सचमुच संसद के सदनों में हम मतदाताओं को अपने बड़े-बड़े भाषणों से भैसों की ही भांति चराने वाले चरवाहे नहीं बल्कि हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को समझने वाले विवेकशील व सुशिक्षित लोग दिखाई पड़ेंगे ?
क्या अब सच में उन नेताजी लोगों के दिन लद गए जो एक ‘नीतिज्ञ’ होने की ज़िम्मेदारियों को नज़रअंदाज़ कर एक-दूसरे पर बयानबाजी कर महज अपना मनोरंजन किया करते थे ?
क्या अब सचमुच सदनों में बस वही लोग पहुँच पाएंगे जिनके पास इस देश अथवा समाज के विकास के लिए कुछ सोच होगी ?
क्या अब कुछ ही वर्षों में भारतीय-युवामन में गहरे समायी यह उक्ति “पॉलिटिक्स इज़ अ डर्टी गेम की जगह यह उक्ति ले लेगी कि “पॉलिटिक्स इज़ अबाउट रिस्पांसिबिलिटी ऐंड हेल्दी लीडरशिप ” ?

क्या ऐसा अब जल्द ही होगा …….?
क्या सचमुच ऐसा होगा..??…….

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